विजय कुमार
-नई दिल्ली,जनवरी। खेल मंत्रालय द्वारा खिलाडियों को दिए जाना वाला अर्जुन पुरस्कार एक बार फिर से विवादों में पडता नजर आ रहा है। इस बार विवाद का कारण बना है खो-खो खेल मंे निर्मला भाटी को दिया जाना। मालूम हो कि अर्जुन अवार्ड कमेटी द्वारा निर्मला भाटी को अर्जुन पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। जिसके बाद से विवाद शुरू हो गया है। इसके पीछे का कारण है कि निर्मला भाटी के प्रमाण पत्रों का। इस बाबत महाराष्टृ खो-खो
एसोशीसेशन
के महासचिव चरणजीत जाधव ने खेल मंत्रालय को निर्मला भाटी को लेकर जो पत्र लिखा है उसमें उन्होंने कहा है कि भाटी ने आज तक कभी भी स्वर्ण पदक नहीं जीता है। दूसरा उसको फेडरेशन के कुछ पदाधिकारियों की मिली भगत से नेपाल और भारत की बीच खेले मैत्री मैच में खेलने का अवसर दिया गया। जिसके बाद वह वल्र्ड कप खेली। जबकि ऐसे कई खिलाडी है, जिन्होंने अर्जुन अवार्ड को लेने के लिए सरकार से अनुरोध किया था। मगर सभी को पीछे रख कर निर्मला भाटी को यह सम्मान दे दिया गया। मजेदार बात यह है कि ना तो खो-खो भारतीय ओलंपिक संघ और न ही ओलंपिक काउंसिल आॅफ एशिया ओसीए से मान्यता प्राप्त है। यही नहीं उसको तो खेल मंत्रालय से भी मान्यता मान्यता नहीं है। एशियन खो-खो फेडरेशन से जिन्हें मान्यता मिली है वह खो खो इंडिया है । वर्तमान में जिस फेडरेशन से जुडे खिलाडी को अर्जुन पुरस्कार दिया गया है वह किसी मान्यता प्राप्त फेडरेशन से नहीं है। मगर उसको कैसे अर्जुन पुरस्कार दिया गया।
खो-खो खेल से जुडे कुछ खिलाडियों ने यह भी बताया है कि अर्जुन पुरस्कार तो जुगाड से ले लिया गया, अब द्रोणाचार्य पुरस्कार पर भी हक जमाया जा रहा है। बताया यह भी जा रहा है कि इन सब घपलों के पीछे भारतीय खेल प्राधिकरण और मंत्रालय के कुछ लोगों की मिली भगत है। अगर इस बाबत सही से जांच की जाए तो दूध का दूध पानी का पानी हो जायेगा।
