पूरी दुनिया की सियासत (राजनीति) एक तरफ और तिजारत (कारोबार) दूसरी तरफ दोनों किसी से कम नहीं है, क्योंकि राजनीति हो या कूटनीति उसे आगे बढ़ने के लिए पूंजी रूपी जिस बैसाखी की जरूरत होती है, वो व्यापार-कारोबार से पैदा होती है. वैश्विक सप्लाई चेन समुद्री मार्गों से चलती हैं. वैश्विक समुद्री व्यापार का एक बड़ा हिस्सा स्वेज नहर समेत दुनिया के व्यस्ततम समुद्री रूटों से चलता है. भारत से माल अमेरिका भेजना हो या रूस पारंपरिक मार्गों से व्यापार करने में बहुत समय और पैसा लगता है. इंटरनेट और सोशल मीडिया की इस दुनिया में पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने नए कारोबारी रास्ते की चर्चा करके एक तीर से दो निशाने साधने की कोशिश की है.
नए रूट पर चर्चा
राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच चेत्रई-व्लादिवोस्तोक ईस्टर्न कॉरिडोर को लेक महत्वपूर्ण चर्चा हुई. पीएम मोदी के विजन 2047 को ध्यान में रखते हुए इस समुद्री रूट को जल्द शुरू करने पर सहमति बनी है. माना जा रहा है कि कि वैश्विक तनाव के बीच यह नया रास्ता भारत-रूस के कारोबारी रिश्तों को एतिहासिक आर्थिक सुरक्षा देने में गेमचेंजर साबित हो सकता है. नया रूट पुराने पारंपरिक रूटों से सुरक्षित, तेज और भरोसेमंद विकल्प प्रदान करेगा. यूरोप के रास्ते रूस तक पहुंचने वाले पारंपरिक समुद्री रूट में लगातार नई-नई चुनौतियां आ रही हैं. ऐसे में नया ईस्टर्न कॉरिडोर दोनों देशों के लिए फायदे का सौदा होगा.
