‘समाज ने संघ के स्वयंसेवकों को देखने-परखने के बाद स्वीकार किया’; पीएम की मौजूदगी में बोले भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने समाज में आरएसएस स्वयंसेवकों की स्वीकार्यता को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बीते 100 साल की लंबी यात्रा में समाज ने संघ के स्वयंसेवकों को देखने-परखने के बाद स्वीकार कर लिया है।

महाराष्ट्र के नागपुर में एक सभा को संबोधित करते समय संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की लंबी यात्रा के दौरान समाज ने संघ के स्वयंसेवकों को देखा, परखा उसके बाद स्वीकार किया है। इसी का नतीजा है कि तमाम बाधाओं को दूर करते हुए अब स्थिति अनुकूल है और स्वयंसेवक लगातार आगे बढ़ रहे हैं। भागवत ने कहा कि संघ के दर्शन में कहा जाता है कि आत्म-विकास पर एक घंटा, जबकि समाज के विकास पर 23 घंटे खर्च करना चाहिए। यही संघ का नजरिया है और आरएसएस के तमाम प्रयास इसी सिद्धांत से प्रेरित हैं।

पीएम मोदी की मौजूदगी में बोले संघ प्रमुख
संघ प्रमुख भागवत ने जब यह बात कही, उस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहे। पीएम की मौजूदगी में भागवत ने कहा कि स्वयंसेवक अपने लिए कुछ नहीं मानते, वे सिर्फ सेवा करते रहते हैं। बता दें कि इसी साल सितंबर में संघ की स्थापना के 100 साल पूरे होने वाले हैं। संघ की लंबी यात्रा को रेखांकित करते हुए भागवत ने कहा कि देश ने संघ के स्वयंसेवकों का काम देखा है, इसके बाद उन्हें स्वीकार किया गया है।

पीएम मोदी ने भी संघ की जमकर सराहना की
भागवत से पहले पीएम मोदी ने भी भारत में संघ की भूमिका को रेखांकित किया। नागपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माधव नेत्रालय प्रीमियम सेंटर की आधारशिला रखने के बाद कहा कि आज भारत की सबसे बड़ी पूंजी हमारा युवा है। आज भारत का युवा विश्वास से भरा हुआ है। राष्ट्र निर्माण की भावना से ओत-प्रोत हमारे युवा आगे बढ़े चले जा रहे हैं। यही युवा 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य की ध्वजा थामे हुए हैं।

गुलामी की मानसिकता को तोड़ कर आगे बढ़ रहा है भारत
गौरतलब है कि राजनीतिक जीवन की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री अपनी युवावस्था में खुद भी संघ के स्वयंसेवक रह चुके हैं। आज उन्होंने इस कार्यक्रम में संघ की अहमियत का भी जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि जब प्रयासों के दौरान मैं नहीं हम का ध्यान होता है, जब राष्ट्र प्रथम की भावना सर्वोपरि होती है, जब नीतियों में, निर्णयों में देश के लोगों का हित ही सबसे बड़ा होता है, तो सर्वत्र उसका प्रभाव भी नजर आता है। आज हम देख रहे हैं कि भारत कैसे गुलामी की मानसिकता को तोड़ कर आगे बढ़ रहा है।

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April 1, 2025
8:41 pm

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