भारत के लिए जापान की क्या अहमियत है और दोनों देश किस मुद्दे पर बात करेंगे? इसके अलावा भारत और जापान किन-किन समझौतों पर मुहर लगा सकते हैं? भारत किस एक समझौते पर सबसे करीबी से नजर रख रहा है? इसके अलावा ट्रंप के टैरिफ लगाने के फैसले के बीच दोनों देश आर्थिक रिश्तों को लेकर क्या कर सकते हैं? आइये जानते हैं…

अमेरिका की तरफ से भारत पर लगाए गए 50 फीसदी आयात शुल्क को लेकर हर तरफ चर्चाएं जारी हैं। कहा जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन के टैरिफ लगाने के फैसले से भारत के व्यापार पर पड़ने वाले नकारात्मक असर को न्यूनतम रखने के लिए अगले कुछ दिनों में मोदी सरकार अगले कुछ दिनों में अहम समझौते कर सकती है। टैरिफ के प्रभावी होने के बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पहले विदेश दौरे पर जापान के लिए रवाना हो रहे हैं। अपने दो दिवसीय दौरे (28 अगस्त-29 अगस्त) के बीच पीएम मोदी न सिर्फ भारत-जापान के सालाना सम्मेलन का हिस्सा बनेंगे, बल्कि वे अपने जापानी समकक्ष शिगेरु इशिबा से भी मुलाकात करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करीब सात साल बाद भारत-जापान के वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लेने जा रहे हैं। इससे पहले वे 2018 में इस सम्मेलन का हिस्सा बने थे। मोदी जापान दौरे के बाद शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सम्मेलन के लिए चीन भी जाएंगे। यहां वे तियानजिन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के न्योते पर बैठक का हिस्सा बनेंगे। इसके अलावा पीएम मोदी सम्मेलन से इतर शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात कर सकते हैं।
पीएम मोदी के जापान रवाना होने के बीच यह जानना अहम है कि आखिर भारत के लिए इसकी क्या अहमियत है और दोनों देश किस मुद्दे पर बात करेंगे? इसके अलावा भारत और जापान किन-किन समझौतों पर मुहर लगा सकते हैं? भारत किस एक समझौते पर सबसे करीबी से नजर रख रहा है? इसके अलावा ट्रंप के टैरिफ लगाने के फैसले के बीच दोनों देश आर्थिक रिश्तों को लेकर क्या कर सकते हैं
पहले जानें- क्या है भारत-जापान के रिश्तों का इतिहास?
जापान की प्रसिद्ध ‘शिचिफुकुजिन’ यानी सात सौभाग्यशाली देवताओं की उत्पत्ति हिंदू परंपराओं से जुड़ी मानी जाती है। ऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक, भारत-जापान में पहला संपर्क 752 ईस्वी में हुआ था, जब एक भारतीय साधु बोधिसेना ने नारा के तोदाईजी मंदिर में भगवान बुद्ध की विशाल मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा की थी।
आगे के वर्षों में स्वामी विवेकानंद, नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर, उद्योगपति जेआरडी टाटा, स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस और जस्टिस राधा बिनोद पाल जैसी शख्सियतों ने भारत-जापान संबंधों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। खासकर युद्ध अपराध ट्रिब्यूनल के फैसले में जस्टिस राधा बिनोद पाल की इकलौती असहमति को जापान में काफी आदर भाव से देखा गया है।