पश्चिम बंगाल में राज्यसभा उपचुनाव से ठीक पहले टीएमसी को छोड़कर भाजपा में शामिल हुए सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक को भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया है। इन तीनों ने पिछले महीने टीएमसी से इस्तीफा दिया था।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए तीन पूर्व राज्यसभा सांसद को बड़ा इनाम मिला है। सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बड़ाईक को भाजपा ने राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है।
तीनों नेताओं ने गुरुवार को ही भाजपा की सदस्यता ली और पार्टी ने कुछ ही घंटों बाद उन्हें टिकट देकर बड़ा राजनीतिक संदेश दे दिया। यह उपचुनाव उन तीन सीटों पर हो रहा है जो इन नेताओं के इस्तीफे के बाद खाली हुई थीं। चुनाव आयोग ने इन सीटों पर 24 जुलाई को मतदान कराने का एलान किया है।
हम सिर्फ विकास चाहते हैं– प्रकाश चिक बड़ाईक
राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने के बाद प्रकाश चिक बड़ाईक ने कहा कि पश्चिम बंगाल में पिछले 49 वर्षों में, 34 साल के वाम शासन और 15 साल के तृणमूल शासन के दौरान कई विकास कार्य पूरे नहीं हो सके। राज्य और केंद्र सरकार के बीच तालमेल की कमी रही। पांच साल तक 100 दिन रोजगार योजना का पैसा रुका रहा और गरीबों के लिए कई योजनाएं प्रभावित हुईं।
बड़ाईक ने आगे कहा कि इस बजट में उत्तर बंगाल में एम्स, कई मेडिकल कॉलेज, सिलीगुड़ी से दिल्ली तक बुलेट ट्रेन और हासीमारा में एयरपोर्ट का प्रस्ताव है। हम सिर्फ विकास चाहते हैं। अगर पहले ही राज्य और केंद्र के बीच बेहतर तालमेल होता, तो ये समस्याएं पैदा नहीं होतीं।
टीएमसी छोड़ने के बाद भाजपा में नई पारी
बता दें कि पिछले महीने सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बड़ाईक ने टीएमसी से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी थी। इसके बाद से ही उनके अगले कदम को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही थीं। गुरुवार को इन सभी अटकलों पर विराम लग गया, जब तीनों नेताओं ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली।
सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बड़ाईक टीएमसी के प्रमुख चेहरों में गिने जाते थे। ऐसे नेताओं का पहले पार्टी छोड़ना और फिर भाजपा की ओर से राज्यसभा उम्मीदवार बनाया जाना ममता बनर्जी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि बंगाल की राजनीति में भाजपा सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि राज्यसभा में भी अपनी मौजूदगी मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
