UGC विरोध के बीच क्यों याद आ रहा ‘मंडल आयोग’, जब 90 के दशक में मच गया था बवाल

भारत में एक बार फिर से सवर्ण सड़क पर उतरने को तैयार हैं… वजह है  UGC द्वारा जारी किए गए नए नियम. जातिगत भेदभाव को खत्म करने के लिए जो नियम यूजीसी ने बनाए अब उसी का हर तरह विरोध हो रहा है. यूनिवर्सिटी कॉलेज से लेकर अधिकारी और नेताओं ने भी इसका विरोध शुरू कर दिया है. अब इस नियक के विरोध का स्वर बढ़ता ही जा रहा है. ऐसे में आइए समझते हैं कि आखिरी यूजीसी को यह बिल क्या है सवर्णों के विरोध का क्या असर होगा और साथ में यह भी जानेंगे कि 1090 की तरह क्या फिर से देशभर में सवर्ण आदोंलन शुरू होगा

भारत की उच्च शिक्षा और सामाजिक न्याय की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने 2026 में नए नियम बनाए हैं जिसका नाम है Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations 2026. ये नियम यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव को दूर करने के लिए है. यूजीसी के नियमों के अनुसार  देश भर की सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में एक कमेटी बनेगी जिसका नाम होगा इक्विटी. ये कमेटी SC-ST और OBC छात्रों की शिकायतें सुनेगी और तय समय में उनका समाधान करेगी. कमेटी में एससी-एसटी, ओबीसी, दिव्यांग और महिलाओं का होना अनिवार्य है. कमेटी का काम कैंपस में बराबरी का माहौल बनाना और पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए योजनाएं लागू करना होगा.

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July 27, 2026
11:23 am

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