नेहरू से लेकर अब तक… फिलिस्तीन का पुराना साथ, इजराइल का नया विश्वास; अरब जगत को संदेश या चीन को जवाब?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजराइल यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत ने 100 से अधिक देशों के साथ मिलकर कब्जे वाले वेस्ट बैंक में इजरायली विस्तार की आलोचना की है. एक ओर भारत का ऐतिहासिक रूप से फिलिस्तीन के साथ जुड़ाव रहा है, तो दूसरी ओर पिछले तीन दशकों में इजराइल के साथ उसके रिश्ते मजबूत हुए हैं. यही द्वंद्व आज भारतीय कूटनीति के केंद्र में है. क्या यह दौरा अरब जगत के लिए संतुलन का संदेश है या चीन को रणनीतिक जवाब? आइए समझते है पीएम मोदी के इस दौरे को..

1950 में भारत ने इजराइल को दी मान्यता

भारत की विदेश नीति की शुरुआत ही औपनिवेशिक विरोध और आत्मनिर्णय के सिद्धांत से हुई थी. महात्मा गांधी ने 1938 में लिखा था कि फिलिस्तीन अरबों का है और वहां किसी समाधान में स्थानीय जनता की सहमति अनिवार्य होनी चाहिए.

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May 30, 2026
2:13 pm

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